देश भर में चल रहे कोचिंग सेंटर आज शिक्षा व्यवस्था की खामियों का नतीजा है। आज ट्यूशन, पढाई के लिये एक जरुरत बन गया है, ज़्यादातर बच्चे अपनी पढाई पूरी करने के लिए ट्यूशन लेने लगे हैं। वो इसलिये क्योंकि बच्चे पढाई में कमज़ोर हों या आउटस्टेंडिंग प्रदर्शन करना हो उसके लिये तो ट्यूशन फायदेमन्द साबित हो रहे हैं ट्यूशन के बहाने वे प्रतिदिन पढाई करते हैं. यदि ट्यूटर प्रशिक्षित हों तो वे अच्छे पथ प्रदर्शक साबित हो सकते हैं. कुछ स्कूल के शिक्षक बच्चों की पढाई पर विशेष ध्यान नहीं देते. पाठ समझ में आये या न आये वे कक्षा में पढ़ा कर चले जाते हैं. अपवाद के तौर पर कुछ शिक्षक अच्छे हो सकते हैं. इसके विपरीत ट्यूशन पढाने वाले शिक्षक यह ध्यान में रखते हैं की विद्यार्थी अपने पाठ को ठीक तरह से समझ रहा है या नही। साथ उन्हें इस बात का डर रहता है कि अगर विद्यार्थी के परिणाम अच्छे न हुए तो इसके ज़िम्मेदार तो वही कहलाते है यही वजह है कि पढने के लिये सचेत रखते हैं ताकि परीक्षा के परिणाम अच्छे हों. उनकी प्रतिष्ठा बढे और अधिक से अधिक बच्चे ट्यूशन पढ़ने लिये दाखिल हों